ओपन ऑफिस में प्राइवेसी चाहिए तो फोन बूथ में जाइए

वे बिल्कुल फोन बूथ जैसे दिखते हैं, लेकिन उनमें टेलीफोन नहीं होता. उनमें बैठ कर या खड़े होकर बात की जा सकती हैं.
कांच के दरवाजे के आर-पार सब कुछ दिखता है, लेकिन उनकी साउंड-प्रूफ दीवारें कोई आवाज़ बाहर नहीं आने देती.
यदि आपने पिछले कुछ वर्षों में केबिन रहित खुले दफ़्तरों में काम किया है तो आपने वहां ऐसे बूथ ज़रूर देखे होंगे.
वे मुंबई के दफ़्तरों से लेकर जापान के रेलवे स्टेशनों तक और उत्तर अमरीका से लेकर ब्रिटेन तक के निजी दफ़्तरों में मिलने लगे हैं.
2015 में फ़िनलैंड की फ्रेमरी इकलौती कंपनी थी, जिसने कॉमर्शियल डिज़ाइन की सालाना प्रदर्शनी नियोकॉन में अपना ऑफ़िस "फोन बूथ" प्रदर्शित किया था.
नियोकॉन के उपाध्यक्ष बायरन मॉर्टन के मुताबिक इस साल करीब दर्जन भर कंपनियों ने अपने फोन बूथ का प्रदर्शन किया. इनमें से कई कंपनियां नई हैं.
फ्रेमरी ने पिछले साल 10 हजार फोन बूथ बनाए थे. इस साल उसे 15 हजार बूथ बनाने की उम्मीद है.
कनाडा की वनटूसिक्स कंपनी एक जनरल डिज़ाइन कंपनी के रूप में स्थापित हुई थी, लेकिन अब यह अपने "लूप" फोन बूथ की डिज़ाइन और उत्पादन पर ही ध्यान केंद्रित कर रही है.
इस कंपनी के सह-संस्थापक निक कज़कॉफ़ का कहना है कि लूप फोन बूथ उनके कारोबार का बड़ा हिस्सा बन चुका है, जिससे कंपनी का करीब 60 से 70 फीसदी बिजनेस आता है.
लूप फोन बूथ को खरीदने के इच्छुक लोगों के इन्क्वायरी कॉल पिछले साल के मुकाबले 5 गुना बढ़ गए हैं.
छोटे बूथों में देर तक नहीं बैठा जा सकता, लेकिन कुछ कर्मचारियों के लिए वे शोरगुल से भरे खुले दफ़्तरों में राहत की इकलौती जगह हैं.
हाल के दिनों में काम करने के लिए निजी जगहों की मांग बढ़ी है, लेकिन खुले दफ़्तर और उनकी समस्याएं करीब आधी सदी से मौजूद हैं.
"क्यूब्ड: ए सीक्रेट हिस्ट्री ऑफ़ दि वर्कप्लेस" के लेखक निकिल सावल का कहना है कि 20वीं सदी की शुरुआत में यूरोपीय दफ़्तर "अमरीकी प्लान" को अपनाने लगे थे. नये दफ़्तरों में डेस्क एक-दूसरे से समकोण पर होते थे.
1958 में जर्मनी के दो भाइयों वोल्फगैंग और एबरहार्ड श्नेले ने Bürolandschaft डिजाइन पेश की.
सावल कहते हैं, "यह पहले से अधिक तार्किक योजना थी जिसमें इस बात का ख़्याल रखा गया था कि नये दफ़्तरों में लोग कैसे चलेंगे और सूचनाओं का प्रवाह कैसे होगा."
यूरोप ने इस योजना को चुनिंदा तरीके से अपनाया, लेकिन अमरीका ने इसे हाथों हाथ लिया. 2014 तक अमरीका के 70 फीसदी दफ़्तर केबिन रहित हो गए.
लेकिन अमरीकी श्रमिकों को ये पसंद नहीं आते. एक सर्वे से पता चला कि सिर्फ़ 28 फीसदी कर्मचारियों को ऐसे दफ़्तर पसंद हैं.
सवाल है कि यदि ओपन प्लान ऑफिस में कुछ नया नहीं है तो ऑफिस फोन बूथ का बाज़ार क्यों इतनी तेज़ी से बढ़ रहा है?
रॉयल सोसाइटी ने पिछले साल एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसके मुताबिक खुले दफ़्तरों ने मेल-मुलाकात और आमने-सामने की बातचीत 70 फीसदी तक कम कर दी है और इलेक्ट्रॉनिक संचार में 20 से 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के एसोसिएट प्रोफेसर और शोध के लेखकों में से एक ऐथन एस. बर्नस्टीन कहते हैं, "निश्चित रूप से उनकी लागत कम है, लेकिन वे मेल-जोल रोकते हैं, इसलिए सहयोग घटता है."
लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम फिर से केबिन वाले बंद दफ़्तरों की ओर बढ़ रहे हैं, बल्कि जगह को लेकर हमारे दफ़्तर पहले से भी अधिक लचीले हो रहे हैं.

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